ज्ञानहीनता क्या है? जो कुछ भी ज्ञान के रूप में पाया है उसका कोई तातपर्य नहीं है। केवल यही ज्ञात होता है की इस ज्ञान से कुछ भी बदल नहीं सकता। जो जैसे चल रहा है वो वैसे ही चलेगा।
ज्ञान मार्ग में स्पष्ट रूप से यह बताया जाता है, अन्य मार्गों में यह ज्ञान अपने आप समय आने पर हो ही जाता है।
मेरा इस मार्ग में होना मुझे कोई श्रेष्ट व्यक्ति नहीं बनाता। यह तो मात्र एक खेल है, जिसमे कोई भी कहीं भी हो सकता है, और वह पूर्ण रूप से दैवित्व है।